साल 2026 में महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी (रविवार) को मनाया गया। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन व्रत कथा सुनने या पढ़ने का विशेष महत्व है क्योंकि यह कथा भगवान शिव की असीम कृपा और करुणा को दर्शाती है।
2026 महाशिवरात्रि पूजा मुहूर्त (Puja Muhurat)
| विशेष समय | तिथि और मुहूर्त |
| चतुर्दशी तिथि प्रारंभ | 15 फरवरी 2026, शाम 05:04 बजे से |
| चतुर्दशी तिथि समाप्त | 16 फरवरी 2026, शाम 05:34 बजे तक |
| निशिता काल (मुख्य पूजा) | 16 फरवरी, रात 12:09 AM से 01:01 AM तक |
| पारण (व्रत खोलने का समय) | 16 फरवरी, सुबह 06:59 AM से दोपहर 03:24 PM के बीच |
महाशिवरात्रि व्रतकथा (Vrat Katha)
सबसे प्रचलित कथा चित्रभानु नामक शिकारी की है, जो अनजाने में ही शिव भक्ति का पात्र बन गया:
1. अनजाने में हुआ व्रत
प्राचीन काल में एक शिकारी था जो पशुओं का शिकार कर अपना पेट पालता था। एक बार वह कर्ज न चुका पाने के कारण बंदी बना लिया गया। उस दिन महाशिवरात्रि थी। बंदीगृह में उसने शिव चर्चा सुनी और कथा का श्रवण किया। शाम को साहूकार ने उसे कर्ज चुकाने के वादे पर मुक्त किया।
2. बेलपत्र और अभिषेक
भूखा-प्यासा शिकारी शिकार की तलाश में जंगल गया और एक बेल के पेड़ पर चढ़कर रात बीतने का इंतजार करने लगा। उस पेड़ के नीचे एक शिवलिंग था, जो पत्तों से ढका हुआ था। शिकारी ने अनजाने में अपनी प्यास बुझाने के लिए जो पानी छिड़का और टहनियां हिलाने से जो बेलपत्र गिरे, वे सीधे शिवलिंग पर जा गिरे। इस प्रकार पहले प्रहर की पूजा संपन्न हो गई।
3. करुणा और अहिंसा
रात के दौरान उसके पास तीन हिरणियां और एक हिरण आए। उन सभी ने अपने परिवार के प्रति जिम्मेदारी का हवाला देते हुए वापस लौटने का वचन दिया। शिकारी का हृदय बदल गया और उसने उन पर दया कर उन्हें जाने दिया। इस पूरी प्रक्रिया में, रात के चारों प्रहरों में शिकारी द्वारा अनजाने में ही अभिषेक और बेलपत्र अर्पण होता रहा।
4. शिव कृपा
शिकारी का हृदय इतना शुद्ध हो गया कि उसने शिकार करना छोड़ दिया। उसकी इस अनजाने में की गई भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसे दर्शन दिए और उसे मोक्ष प्रदान किया। यही शिकारी अगले जन्म में निषादराज गुह बने, जिन्होंने वनवास के दौरान भगवान श्री राम की सेवा की थी।
महाशिवरात्रि का महत्व
- यह रात्रि शिव और शक्ति (माता पार्वती) के मिलन यानी विवाह का उत्सव है।
- मान्यता है कि इसी रात महादेव ने तांडव कर ब्रह्मांड का सृजन और विनाश संतुलित किया था।
- भक्त इस दिन उपवास रखते हैं और रात्रि जागरण कर “ॐ नमः शिवाय” का जाप करते हैं।
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